सोनिया बोलीं– मेरी किताब आएगी, तो तमाशा होगा:VIDEO में कहा- दशकों से लोगों ने मेरी कहानी बताई, अब मेरी बारी; 10 नवंबर को बुक लॉन्च

सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी किताब आने पर कुछ ‘तमाशा’ जरूर होगा। दशकों से लोग मेरी कहानी बता रहे, अब मेरी बारी है अपनी कहानी बताने की। सोनिया गांधी का संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को रिलीज होगा। उन्होंने मंगलवार को X पर इसका नया वीडियो पोस्ट किया। यह X पर पिछले हफ्ते जुड़ने के बाद सोनिया गांधी की दूसरी पोस्ट है। वीडियो में वह किताब के पन्ने पलटते हुए अपनी कहानी खुद बताने की बात कहती हैं। X पर सोनिया का पहला पोस्ट, राजीव से रेस्टोरेंट में मिलीं सोनिया, वहीं प्यार हुआ 1970 के दशक में इंग्लैंड का एक अनजान शहर, पसंद के खाने की तलाश और एक ग्रीक रेस्टोरेंट में हुई मुलाकात… सोनिया गांधी शायद तब नहीं जानती थीं कि ये पल उनकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादों में शामिल हो जाएगा। कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से पहली मुलाकात ने दोस्ती का रास्ता खोला। सोनिया ने कहा- यहीं से प्यार की शुरुआत हुई, हमने साथ मिलकर यादों की एक दुनिया बनाई। सोनिया की जिंदगी के 5 किस्से 1. पहली मुलाकात में ही राजीव पसंद आ गए सोनिया ने बताया कि राजीव गांधी से पहली बार मिलने पर उन्हें तुरंत लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह रहना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी ऐसा ही महसूस करते थे। दोनों की दोस्ती पार्टियों, घूमने और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताने से आगे बढ़ी। उन्होंने कहा वह बहुत सौम्य दिखने वाले व्यक्ति थे। बेशक, वह बहुत अच्छे दिखते थे। लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था। 2. इंदिरा से पहली मुलाकात और नए परिवार में ढलना राजीव से शादी के बाद सोनिया ने नेहरू-गांधी परिवार में अपनी जगह बनाई। आत्मकथा में अपनी सास और तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात और भारत में परिवार के साथ जीवन बिताने के अनुभवों का जिक्र है। उन्होंने लिखा कि यहां की भाषा, खानपान और संस्कृति से तालमेल बैठाना भी जीवन का हिस्सा था। किताब में हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय जीवनशैली अपनाने के बारे में भी लिखा है। 3. इंदिरा और राजीव की हत्या के बाद बदली जिंदगी 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। सात साल बाद, 1991 में राजीव की भी हत्या कर दी गई। सोनिया ने बताया कि अपनों को खोने के दर्द ने उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर धकेला। इससे पहले वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना चाहती थीं। 4. राजीव की हत्या के बाद भी राजनीति से दूर रहीं 1991 में राजीव की हत्या के बाद भी सोनिया राजनीति से दूर रहीं। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर होने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए। 1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है। 5. पीएम बनने का मौका मिला, लेकिन मनमोहन सिंह को चुना 2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। हालांकि, NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी। --------------- ये खबर भी पढ़ें… सोनिया गांधी पहली बार सोशल मीडिया पर, इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया:नई किताब का वीडियो शेयर किया, यह 10 नवंबर को लॉन्च होगी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को पहली बार अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। उन्होंने अपनी पहली पोस्ट में आने वाली किताब पूरी खबर पढ़ें…।

Comments


Popular posts from this blog

गैस की किल्लत, ₹900 वाला सिलेंडर ₹1800 में मिल रहा:कॉमर्शियल के ₹4 हजार वसूले जा रहे; इंडक्शन की डिमांड 50% बढ़ी

दिल्ली दंगा- पूर्व AAP पार्षद ताहिर समेत 5 को उम्रकैद:IB अफसर की हत्या के दोषी; कोर्ट बोला- घटना गंभीर, इसने समाज को झकझोर दिया

जलदाय विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही मनमानी हठधर्मिता से जल का दुरुपयोग हो रहा है