सुभाष चंद्रा केस में NCLT ने 5 सदस्यीय बेंच बनाई:₹22 हजार करोड़ के दावों के सामने सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान; आज सुनवाई
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सोमवार को सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े मामले में पांच सदस्यीय बेंच बनाई। यह बेंच 6.5 करोड़ रुपए के भुगतान पर फैसला करेगी। इस मामले में 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के दावे हैं। बेंच मंगलवार सुबह 10:15 बजे NCLT की प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई शुरू करेगी। दो सदस्यीय बेंच इस योजना पर बहुमत का फैसला नहीं दे सकी थी। इसके बाद मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए NCLT के अध्यक्ष के पास भेजा गया। यह NCLT के इतिहास में पहली बार है, जब पांच सदस्यीय बेंच बनाई गई है। बेंच की अध्यक्षता प्रेसिडेंट जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल करेंगे। इसके बाकी सदस्य बचु वेंकट बालाराम दास, महेंद्र खंडेलवाल, अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चतुर्वेदी हैं। 2 सदस्यीय बेंच में अलग-अलग राय आई इससे पहले NCLT की दो सदस्यीय बेंच में भुगतान योजना को लेकर दोनों सदस्यों की राय अलग थी। इसलिए मामला तीसरे सदस्य के पास भेजा गया। तीसरे सदस्य ने 26 अगस्त को 6.5 करोड़ रुपए की भुगतान योजना को मंजूरी दी। अशोक कुमार भारद्वाज ने अपने आदेश में कहा था कि योजना सिर्फ उन लेनदारों पर लागू होगी, जिन्होंने इसके पक्ष में वोट दिया है। ऐसे लेनदार करीब 80.8% थे। उन्होंने असहमत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सुभाष चंद्र से अलग से कर्ज वसूलने की छूट दी थी। इनकी हिस्सेदारी करीब 19.2% थी। इसके बाद बहुमत की राय के आधार पर अंतिम आदेश जारी करने के लिए मामला दो सदस्यीय बेंच को भेजा गया। यह प्रक्रिया कंपनी कानून, 2013 की धारा 419(5) के तहत जरूरी है। बेंच ने कहा कि सदस्य न्यायिक ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों और असहमत लेनदारों का मूल कर्ज खत्म नहीं किया था। वहीं, तीसरे सदस्य ने भुगतान योजना मंजूर करते हुए धारा 115(1) के तहत सभी लेनदारों के अधिकार खत्म कर दिए। असहमत कर्जदाताओं ने NCLAT का रुख किया सोमवार को सुभाष चंद्र के असहमत कर्जदाताओं ने एहतियात के तौर पर NCLAT का रुख किया। उन्होंने तीसरे सदस्य के उस फैसले के खिलाफ अपील की, जिसमें करीब 22,006.57 करोड़ रुपए के कर्ज दावों के मुकाबले 6.5 करोड़ रुपए का भुगतान मंजूर किया गया था। LIC हाउसिंग फाइनेंस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NCLAT में मामला रखा। बेंच में कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस योगेश खन्ना भी शामिल थे। मेहता ने मामले की तुरंत सुनवाई की मांग की। मेहता ने केनरा बैंक और यूनियन बैंक की ओर से भी दलील दी। उन्होंने कहा कि अगर यह आदेश लागू रहा तो इससे इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) का मूल उद्देश्य खत्म हो जाएगा। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के आरोपों को गलत बताया, कहा- मीडिया का इस्तेमाल किसी पर हमले के लिए नहीं किया एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की ओर से मीडिया प्लेटफॉर्म्स के गलत इस्तेमाल करने के आरोपों को रिलायंस ने बयान जारी कर गलत बताया है। चंद्रा ने आरोप लगाया था कि रिलायंस की ओर से उन पर गलत आरोप लगाते हुए फेक खबरें प्लांट की जा रहीं हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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