सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था; 23 साल से केस लड़ रही थीं
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था। जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि उनके काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा- जिन महिलाओं को पहले से परमानेंट कमीशन मिल चुका है, वह बना रहेगा। जो अधिकारी केस के दौरान नौकरी से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो। कोर्ट रूम लाइव…. सीजेआई: आज 3 मामलों में फैसला सुनाया जा रहा है- आर्मी, नेवी और एयर फोर्स पर… इसके बाद सीजेआई ने एक-एक कर तीनों सेनाओं के मामलों पर आदेश सुनाया… आर्मी मामलों पर CJI क्या ACR (परफॉर्मेंस रिपोर्ट) सही तरीके से बनी? हमने पाया है कि ACR इस सोच के साथ लिखे गए कि महिलाओं को आगे मौका नहीं मिलेगा। इससे उनकी (महिला अफसर) मेरिट पर असर पड़ा, पुरुष अधिकारियों से पीछे रहीं। महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। यह उनके करियर के खिलाफ गया। आर्टिकल 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ के लिए आदेश दे रहे हैं। नेवी केस में CJI ACR में यहां भी पूर्वाग्रह (bias) मिला। लेकिन ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ सही और गैर-भेदभावपूर्ण है। अधिकारियों को मूल्यांकन का पूरा मापदंड नहीं बताया गया, यह बड़ी कमी। एयर फोर्स केस में CJI न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए। 2007 बैच को 2020-21 में आंका गया, यह प्रक्रिया ठीक नहीं। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
Comments
Post a Comment