नामीबिया, साउथ-अफ्रीका के बाद बोत्सवाना से आए 9 चीते:विशेषज्ञ बोले- जेनेटिक विविधता मजबूत होगी, देश में कुनबा बढ़कर हुआ 48
एमपी के कूनो नेशनल पार्क में शनिवार सुबह 9 और चीते लाए गए। दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 6 मादा और 3 नर चीता वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर, फिर हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क लाए गए। कूनो में अब चीतों का कुनबा 36 से बढ़कर 45 गया है। गांधी सागर अभयारण्य के तीन चीतों को मिलाकर देश में 48 चीते हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव सुबह विशेष विमान से ग्वालियर, फिर हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे। सुबह करीब 9:20 बजे उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में रिलीज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई खेप में मादा चीतों की अधिक संख्या से कूनो में लिंगानुपात (Sex Ratio) बेहतर होगा, जिससे भविष्य में प्राकृतिक प्रजनन की संभावनाएं और प्रबल होंगी। जेनेटिक विविधता और संतुलन पर जोर जानकारों के मुताबिक, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना के चीतों के शामिल होने से कूनो में जेनेटिक विविधता (Genetic Diversity) और मजबूत होगी। कूनो में अब वयस्क चीतों की संख्या में 18 मादा और 16 नर शामिल हैं। सभी 9 चीतों को अगले एक महीने तक विशेष क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा जाएगा। तीन अलग-अलग देशों के चीतों का एक साथ होना इस प्रोजेक्ट की लंबी अवधि की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। देखिए चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ने की तस्वीरें केंद्रीय मंत्री बोले- विविधता संरक्षण की एक ऐतिहासिक साझेदारी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोत्सवाना से लाए गए चीतों के कूनो नेशनल पार्क में रिलीज कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह बोत्सवाना और भारत के बीच जैव विविधता संरक्षण की एक ऐतिहासिक साझेदारी है। उन्होंने कहा- बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन की दिशा में कई देश साथ आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल और प्रयासों से भारत में चीतों के प्रतिस्थापन की योजना पूरी तरह से सफल रही है। भारत में चीता प्रोजेक्ट को साढ़े तीन साल का समय हो गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 48 हो गई है। केंद्रीय वन मंत्री यादव ने कहा कि भारत के प्रयासों से विश्व में जैव विविधता संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है। 97 देश इस मंच के सदस्य बन गए हैं।
भारत में चीतों की वर्तमान स्थिति 2009 में हुआ कूनो का चुनाव भारत में वर्ष 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से ही चीतों को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य से सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक की गई थी। बैठक में चीता संरक्षण कोष के डॉ. लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया था, जिसमें कूनो को सबसे अनुकूल पाया गया। 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य, कूनो पालपुर अभयारण्य एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया। इन तीनों में से भी कूनो अभयारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। कांग्रेस विधायक का आरोप- मेरी विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम, मुझे ही नहीं बुलाया विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि मेरी विधानसभा क्षेत्र होने के बाद भी मुझे कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। साथ ही कहा कि जो लोग हार गए हैं, उन्हें कार्यक्रम में बुलाया जा रहा है। मैं इस पक्षपात को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखूंगा और मुख्यमंत्री से भी शिकायत करूंगा। साथ ही कहा कि चीतों के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला ये वन विभाग के अधिकारी और भाजपा के लोग कर रहे हैं, क्योंकि चीतों को तो कुछ मिल नहीं रहा, इसलिए वे कूनो पार्क छोड़कर दूसरी सीमाओं में प्रवेश कर रहे हैं। डीएफओ, रेंजर और नाकेदार इन पैसों को खा-खाकर मोटे हो रहे हैं, इनकी मोटाई को मैं जल्दी कम करूंगा।
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