TMC में टूट से संसद में NDA मजबूत होगी:लोकसभा में 314, राज्यसभा में 154 सांसद हो सकते हैं; दो-तिहाई बहुमत से 46 और 9 सीट पीछे
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत से संसद में NDA की ताकत अब और बढ़ सकती है। TMC के 20 बागी सांसदों के समर्थन के बाद लोकसभा में NDA की संख्या 294 से बढ़कर 314 तक पहुंच सकती है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव और TMC सांसदों के संभावित इस्तीफों के बाद उच्च सदन में NDA का आंकड़ा 148 से बढ़कर 154 तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए NDA को लोकसभा में 46 और राज्यसभा में 9 सीटों की जरूरत रहेगी। उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को दावा किया, 'गृहमंत्री अमित शाह ने इन सांसदों के गैर-कानूनी तौर पर अलग होने की साज़िश रची थी। यह अजीब कदम लोकसभा में NDA के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।' दरअसल, बजट सत्र के दौरान सरकार परिसीमन बिल के लिए संविधान संशोधन बिलों को लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। भाजपा की इन कोशिशों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सीटों के गणित से समझिए... NDA की अभी मौजूदा स्थिति क्या है? लोकसभा में NDA 314 पर पहुंच जाएगी राज्यसभा में NDA की संख्या 154 तक पहुंच सकती है राज्यसभा में INDIA ब्लॉक 64 सीटों पर राज्यसभा में INDIA ब्लॉक के पास फिलहाल 64 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के TVK को समर्थन देने से DMK नाराज है और उसने गठबंधन से दूरी बना ली है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) भी INDIA ब्लॉक से अलग हो चुकी है। वहीं, YSRCP, BJD और MDMK जैसे क्षेत्रीय दलों के पास भी पर्याप्त संख्या में सांसद हैं। किसी करीबी मतदान की स्थिति में इन दलों की भूमिका अहम हो सकती है। NDA को संसद में दो-तिहाई बहुमत क्यों चाहिए? संसद में दो-तिहाई बहुमत होने से सरकार कुछ ऐसे बड़े फैसले ले सकती है, जिनके लिए साधारण बहुमत काफी नहीं होता। खासकर संविधान संशोधन जैसे मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है। लोकसभा में 54 वोट से गिरा था परिसीमन बिल लोकसभा में 16 अप्रैल 2026 को सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई थी। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई थी। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… राज्यसभा चुनाव- 26 में से 23 उम्मीदवार निर्विरोध जीते:इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा शामिल; 3 सीटों पर 18 जून को वोटिंग 12 राज्य की 26 राज्यसभा सीटों पर 23 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 1-1 सीट पर उपचुनाव थे। जीतने वालों में 12 भाजपा, 5 कांग्रेस, 3 TDP, 1 NCP, 1NPP और 1 जनसेना से है। चुनाव जीतने वालों में कर्नाटक से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मीडिया व प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा का नाम शामिल है। पूरी खबर पढ़ें…
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