उद्धव की शिवसेना की बैठक में 3 सांसद पहुंचे:शिंदे गुट का दावा- 6 सांसद हमारी पार्टी में शामिल; संजय राउत बोले- सांसदों को किडनैप किया
दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक में 9 में से सिर्फ 3 लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे पहुंचे हैं। पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर दिल्ली में होने वाली बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। UBT के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि हमारे सांसदों को किडनैप किया गया है। जो बैठक में आएगा वो हमारे साथ है, जो नहीं आएगा वो गद्दार। वहीं, शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने गुरुवार को दावा किया कि शिवसेना (UBT) के 6 सांसद शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' पूरा हुआ है। दरअसल, यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
पिछले तीन दिन में क्या-क्या हुआ… 17 जून- बुधवार सुबह शिंदे गुट के सचिव किरण पावस्कर और एक मंत्री ने दावा किया कि उद्धव गुट के 6 सांसदों ने एक अलग ग्रुप बनाने के पत्र पर साइन कर दिया है। दिल्ली में संजय राउत, अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। राउत ने इसके बाद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये बेईमान लोग हैं, बेईमानी उनके खून में है। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था। 16 जून- संजय राउत ने सोशल मीडिया (X) पर दावा किया कि सांसदों को तोड़ने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को तोड़ने के लिए ₹50 करोड़ का ऑफर दिया गया है, जिसमें से ₹15 करोड़ की एडवांस रकम आज रात दी जा रही है। शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक ईमेल भेजा। इसमें मांग की गई कि यदि कोई बागी गुट अलग ब्लॉक या किसी पार्टी में विलय का दावा करता है, तो बिना उद्धव गुट का पक्ष सुने कोई फैसला न लिया जाए। 15 जून- मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हुई कि उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इसे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया। UBT सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। 6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं। इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके। बंगाल-महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु पर भाजपा की नजर मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है। बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है। AAP और TMC में भी हुई टूट शिवसेना से पहले इसी साल AAP और TMC में टूट हो चुकी है। 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया था। वहीं, 16 जून को TMC ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन का ऐलान कर दिया था।
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